खेत से बाढ़ का पानी उतरने के बाद सबसे पहले यह सवाल आता है कि नुकसान की सहायता कहां मिलेगी। Bihar Krishi Input Anudan के लिए केवल जिले में बाढ़ आना पर्याप्त नहीं है। अपनी फसल को नुकसान पहुंचाने वाली घटना, उसकी प्रभावित पंचायतों की सूची और किसान का सही पंजीकरण मिलाना जरूरी है। जमीन अपने नाम पर हो या आप दूसरे की जमीन पर वास्तविक खेती करते हों, दोनों के दस्तावेजों का रास्ता अलग है।
4 नवंबर 2026 की जांच में DBT Agriculture के सितंबर-नुकसान वाले application page पर 18 अक्टूबर सुबह 6 बजे से 25 अक्टूबर 2026 रात 10 बजे तक की आवेदन अवधि मिली। यह अवधि समाप्त हो चुकी है; इससे आगे नई window या extension सत्यापित नहीं मिला। इसलिए पुराने “आवेदन शुरू” शीर्षक के भरोसे नया form भरने न बैठें। आवेदन कर चुके हैं तो कृषि इनपुट अनुदान की स्थिति और प्रिंट देखें; नया दावा करना है तो पहले उसी घटना का नया आधिकारिक आदेश जांचें।
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पहले अपने नुकसान का मौसम और घटना पहचानें
एक ही साल में मार्च की आंधी-ओलावृष्टि, अगस्त की बाढ़ और सितंबर के जलस्तर में वृद्धि के लिए अलग सूचनाएं हो सकती हैं। किसी एक की पंचायत सूची और अंतिम तारीख दूसरी घटना का आवेदन नहीं खोलती।
DBT Agriculture के वर्तमान application page के शीर्ष पर सितंबर 2026 में हुई अतिवृष्टि और नदियों के जलस्तर में वृद्धि से नुकसान का विवरण है। लेकिन उसके URL में Input2526Rabi लिखा है। इसी तरह उससे जुड़ी पंचायत PDF का नाम September2027.pdf है, जबकि PDF के अंदर September 2026, 2026–27 लिखा है। Link के नाम से मौसम तय करने के बजाय पेज और मूल document का शीर्षक पढ़ें।
दूसरी तरफ DBT homepage पर उपलब्ध 2026–27 कार्यान्वयन अनुदेश का मूल पत्र 22 सितंबर 2026 का है और उसमें अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह की बाढ़ का मामला है। नीचे दर और नुकसान की शर्त समझाने के लिए उसी document का स्पष्ट संदर्भ दिया गया है; उसे सितंबर की अलग आवेदन अवधि बढ़ाने का आदेश न समझें।

पंचायत सूची में नाम मिले तो अगला सवाल अपने खेत का होगा
सितंबर वाले पेज से जुड़ी मूल प्रभावित पंचायतों की सूची खोलें। यह पंचायतों का विवरण है, किसी किसान को पैसा मिलने की beneficiary list नहीं। इसमें DistName, BlockName और PanchayatName साथ पढ़ने हैं।
- PDF में पहले अपनी घटना और 2026–27 का शीर्षक मिलाएं। दूसरी बाढ़ या रबी की पुरानी सूची को उसी नाम का नया मामला न समझें।
- फोन के PDF viewer में Search/Find विकल्प या कंप्यूटर पर
Ctrl+Fसे अपना district अथवा panchayat नाम खोजें। इस सूची में नाम English में हैं; spelling और block दोनों मिलाएं। - उदाहरण के लिए वास्तविक सूची में DARBHANGA → KIRATPUR → JAMALPUR एक साथ दर्ज हैं। केवल “Jamalpur” मिल जाने से दूसरे जिले के समान नाम वाले गांव को शामिल न मानें।
- अपनी सही पंचायत मिलने के बाद भी खेत की वास्तविक खेती, नुकसान का रकबा और दस्तावेज सत्यापन के विषय हैं। सूची में दर्ज पूरी पंचायत का रकबा अपने व्यक्तिगत आवेदन में न भरें।

नाम नहीं मिले तो अलग spelling, सही block और उसी घटना की पूरी सूची दोबारा देखें। फिर संबंधित कृषि समन्वयक या प्रखंड कृषि कार्यालय से अपने क्षेत्र की स्थिति पूछें। पंजीकरण में गलत पंचायत चुनकर सूची में फिट करने की कोशिश न करें।
जमीन मालिक और वास्तविक खेतिहर के दस्तावेज अलग हैं
सितंबर 2026 वाले सार्वजनिक निर्देशों में किसान के तीन प्रकार हैं। अपनी वास्तविक स्थिति चुनना जरूरी है; केवल वह विकल्प न चुनें जिसमें कम कागज लगते दिख रहे हों।
- स्वयं (भू-धारी) — भूमि के दस्तावेज के लिए पेज में वर्ष 2024–25 से अब तक/गत तीन वर्ष की जमीन रसीद या अद्यतन LPC का उल्लेख है। जमीन का खाता, खेसरा और संबंधित record सही रखें।
- वास्तविक खेतिहर — दूसरे की जमीन पर वास्तविक खेती करने वाले के लिए निर्धारित स्व-घोषणा प्रमाण पत्र का रास्ता है। केवल जमीन अपने नाम न होने से इस श्रेणी की जांच छोड़ न दें।
- स्वयं (भू-धारी) + वास्तविक खेतिहर — दोनों तरह की खेती हो तो भूमि दस्तावेज और लागू स्व-घोषणा, दोनों चाहिए। दोनों प्रकार में अलग-अलग 2 हेक्टेयर जोड़कर लाभ की सीमा न गिनें।
इसी पेज में स्वयं भू-धारी के लिए वंशावली दस्तावेज अमान्य बताया गया है और ऐसी स्थिति में वास्तविक खेतिहर वाले रास्ते का निर्देश है। इसे हर जमीन का मालिकाना प्रमाण मानकर अपलोड न करें। अपनी खेती की स्थिति और सही श्रेणी संबंधित कृषि समन्वयक से मिलाएं।
सिर्फ अपने हस्ताक्षर वाला कागज पूरा घोषणा पत्र नहीं है
पेज से जुड़ा सितंबर 2026 का आधिकारिक स्व-घोषणा प्रपत्र वास्तविक खेतिहर/बटाईदार के लिए है। उसमें गांव, पंचायत, block, जिला, थाना, खेसरा, मूल भू-धारी का नाम, कुल खेती और क्षति का रकबा जैसी जानकारी है। अगल-बगल के दो किसानों का नाम, पता, मोबाइल और हस्ताक्षर देने की जगह भी है।
प्रपत्र स्पष्ट करता है कि किसी एक मान्य जनप्रतिनिधि और कृषि समन्वयक के संयुक्त हस्ताक्षर चाहिए। जनप्रतिनिधि के विकल्पों में वार्ड सदस्य, मुखिया, सरपंच या पंचायत समिति का सदस्य लिखा है। केवल अपना हस्ताक्षर, केवल दो गवाह या केवल किसी एक अधिकारी का हस्ताक्षर इस निर्धारित form की पूरी प्रक्रिया नहीं है।
फॉर्म का शीर्षक और घटना भी मिलाएं। अगस्त वाले अनुदेश की कागजों की सूची को देखकर सितंबर की declaration में पुरानी घटना का विवरण न लिखें। यहां बताया प्रपत्र तैयारी समझने के लिए उपलब्ध है; इससे बंद आवेदन अवधि दोबारा नहीं खुलती।
2 हेक्टेयर की सीमा का मतलब कुल जमीन की सीमा नहीं
सितंबर वाले निर्देशों में अधिकतम 2 हेक्टेयर यानी 494 डिसमिल तक सहायता एक किसान परिवार के लिए है। परिवार में पति, पत्नी और अवयस्क बच्चे बताए गए हैं; परिवार विवरण दर्ज करना अनिवार्य और Aadhaar से सत्यापन का विषय है।
इसका मतलब यह नहीं है कि 2 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन रखने वाला व्यक्ति अपने-आप बाहर हो जाता है। सीमा सहायता के लिए माने जाने वाले पात्र क्षतिग्रस्त रकबे की है, न कि कुल जमीन के स्वामित्व की अनिवार्य अधिकतम शर्त। उसी खेत के लिए मालिक और बटाईदार दोनों को अलग लाभ दिलाने का दावा भी सही नहीं है। अगस्त के कार्यान्वयन अनुदेश में एक खेत के लिए वास्तविक खेती करने वाले एक व्यक्ति और परिवार के एक सदस्य के आवेदन का नियम स्पष्ट है।
कुल खेती वाली जमीन, नुकसान वाला रकबा और अनुदान के लिए पात्र रकबा एक ही संख्या होना जरूरी नहीं है। दस्तावेज देखकर अलग-अलग सही आंकड़े तैयार रखें।
कितनी दर से अनुदान समझें और नुकसान की शर्त क्या है?
22 सितंबर 2026 के मूल कार्यान्वयन अनुदेश में अगस्त की संबंधित बाढ़ से 33% से अधिक क्षतिग्रस्त फसल का उल्लेख है। उसी अनुदेश में फसल क्षेत्र के अनुसार नीचे की दरें हैं। इन्हें हर आपदा या आने वाले वर्ष का बिना शर्त वादा न मानें; अपने नुकसान की घटना पर लागू आदेश भी मिलाना होगा।
- असिंचित फसल क्षेत्र — ₹8,500 प्रति हेक्टेयर; न्यूनतम सहायता ₹1,000।
- सिंचित फसल क्षेत्र — ₹17,000 प्रति हेक्टेयर; न्यूनतम सहायता ₹2,000।
- शाश्वत/बहुवर्षीय फसल — ₹22,500 प्रति हेक्टेयर; न्यूनतम सहायता ₹2,500।
ये प्रति हेक्टेयर दरें हैं, हर पंजीकृत किसान को तय पूरी रकम मिलने की घोषणा नहीं। अनुदेश में अधिकतम 2 हेक्टेयर की सीमा भी है। DBT homepage के छोटे FAQ में दिखने वाली संक्षिप्त rate range के बजाय अपने मामले का मूल आदेश पढ़ें; homepage की सामान्य जानकारी विस्तृत अनुदेश का स्थान नहीं लेती।
आधा हेक्टेयर का एक समझने वाला हिसाब
केवल गणना समझने के लिए मान लें कि लागू आदेश और सत्यापन में किसी किसान का 0.5 हेक्टेयर सिंचित क्षतिग्रस्त रकबा पात्र माना गया है। ऊपर की दर से सामान्य हिसाब ₹17,000 × 0.5 = ₹8,500 होगा। यह काल्पनिक गणना है, किसी वास्तविक किसान की sanction या payment receipt नहीं।
इसमें बैंक में मिली रकम देखकर नुकसान का प्रतिशत नहीं निकाला जा रहा है। पात्र क्षेत्र, फसल की श्रेणी, नुकसान और अंतिम स्वीकृति विभागीय जांच से तय होंगे। एक खेत के लिए अलग-अलग crop labels लगाकर वही रकबा दोबारा न जोड़ें।
रकबा भरते समय unit भी देखना होगा। वर्तमान पेज जमीन की जानकारी डिसमिल में मांगता है और 1 हेक्टेयर = 247 डिसमिल का portal conversion देता है। उसी हिसाब से 0.5 हेक्टेयर करीब 123.5 डिसमिल है। Acre, hectare और dismil को एक समझकर संख्या डालने से दावा बहुत बड़ा या बहुत छोटा हो सकता है; रिकॉर्ड और form की unit मिलाएं।
आवेदन की window हो तो किस क्रम में तैयारी करें?
अभी जांची गई सितंबर वाली window समाप्त है। आगे उसी घटना का विस्तार या नई घटना की window मिले तो पहले उसका आदेश पढ़ें। नीचे का क्रम 2026 के उपलब्ध आधिकारिक अनुदेश और सार्वजनिक form instructions से समझाया गया है; यह बंद form में नया आवेदन करने की अनुमति नहीं है।
- किसान पंजीकरण तैयार करें। अनुदान आवेदन में 13 अंकों की किसान पंजीकरण संख्या का उपयोग है। यह 12 अंकों का Aadhaar या SMS में मिली अलग application number नहीं है। नया पंजीकरण चाहिए तो आधिकारिक किसान पंजीकरण पेज के वर्तमान authentication निर्देश पढ़ें।
- घटना, पंचायत और परिवार मिलाएं। सही सूची और किसान का प्रकार चुनने की तैयारी करें। परिवार के विवरण को अनुमान से न भरें; सितंबर के निर्देश इसे आवश्यक बताते हैं।
- जमीन और खेती का सही विवरण रखें। लागू खाता/खेसरा, कुल जमीन, पात्र नुकसान का रकबा और अपनी श्रेणी के documents तैयार हों। वास्तविक खेतिहर के प्रमाण में आवश्यक संयुक्त सत्यापन पूरा कराएं।
- पंजीकृत मोबाइल और बैंक की स्थिति जांचें। आवेदन का OTP पंजीकृत मोबाइल पर भेजने का निर्देश है। किसान registration की Aadhaar authentication और अनुदान आवेदन का OTP अलग चरण हैं। अपना चालू मोबाइल तैयार रखें।
- Live form और मांगे गए attachments जांचें। उपलब्ध अनुदेश में CAPTCHA,
GET OTP, OTP verification, किसान प्रकार के अनुसार document upload औरSUBMITका क्रम है। कोई नई upload limit या अतिरिक्त field हो तो उसी live निर्देश को मानें; पुराने लेख की size limit न अपनाएं। - पावती सुरक्षित रखें। अनुदेश आवेदन संख्या SMS से मिलने और पंजीकरण संख्या से पावती प्राप्त करने की व्यवस्था बताता है। केवल registration होना या form खुल जाना, submitted subsidy application नहीं है।
आधिकारिक अगस्त वाले अनुदेश में अपने मोबाइल/लैपटॉप से आवेदन और प्रखंड कृषि कार्यालय/ई-किसान भवन में आवेदन कराने का नि:शुल्क विकल्प दिया है। CSC या दूसरे कंप्यूटर केंद्र का रास्ता भी बताया गया है; उस संदर्भ को हर निजी केंद्र की सभी सेवाएं नि:शुल्क होने की घोषणा न मानें।
Status देखते समय सही नंबर के साथ season भी चुनें
आवेदन करने के बाद बार-बार नया form खोजने के बजाय अपने सही वर्ष का रिकॉर्ड देखें। वर्तमान status page पर कोई विवरण भरकर इस लेख के लिए निजी किसान रिकॉर्ड नहीं खोला गया है; नीचे शुरुआती सार्वजनिक form के वास्तविक controls हैं।
- ऊपर दिया कृषि इनपुट अनुदान की स्थिति और प्रिंट वाला official link खोलें।
- पंजीकरण संख्या में अपने 13 अंकों के किसान registration number का उपयोग करें।
- आवेदन प्रिंट/स्थिति में
Application Statusचुनें। पावती चाहिए तो अलगApplication Printविकल्प है। - अगले dropdown में अपने आवेदन का season चुनें। जांचे गए विकल्प 2025-26 Kharif (Nov), 2025-26 Kharif, 2025-26 Rabi-March और 2026-27 हैं। अपना आवेदन जिस मामले का है उसी से मिलाएं।
- Search करें और आगे दिखने वाला वास्तविक परिणाम या remark पढ़ें। उसे अपनी पावती, संबंधित घटना और बैंक रिकॉर्ड से मिलाएं।

यदि आपको अपनी किसान registration की जानकारी ही जांचनी है तो अलग Registration Status पेज पर Search By में Registration Id, Aadhaar No या Mobile No के विकल्प और captcha हैं। वह पंजीकरण की जांच है, इनपुट अनुदान का व्यक्तिगत payment status नहीं।
आवेदन सही है, फिर भी पैसा नहीं दिख रहा तो कहां जाएं?
रिकॉर्ड नहीं मिला तो पहले 13 अंकों की संख्या, सही season और पावती का मिलान करें। मार्च की रबी application को दूसरी खरीफ window में खोजने से सही दावा नहीं मिल सकता। फिर भी अंतर रहे तो पावती लेकर संबंधित कृषि समन्वयक/प्रखंड कृषि कार्यालय से उसी घटना का रिकॉर्ड जांचवाएं।
दस्तावेज या रकबे पर आपत्ति है तो अपना वास्तविक remark समझें। अगस्त के मूल अनुदेश में कृषि समन्वयक द्वारा खेत, वास्तविक खेती करने वाले, नुकसान और प्रमाण की जांच है। अपनी भूमि रसीद/LPC या सत्यापित declaration की जो कमी बताई गई है, उसी के लिए कार्यालय से लागू सुधार का रास्ता पूछें। हर पुराने आवेदन पर अपने-आप 48 घंटे की correction window मान लेना सही नहीं है।
स्वीकृति दिख रही है, लेकिन बैंक में जमा नहीं है तो आवेदन की मंजूरी और राशि का वास्तविक credit अलग जांचें। उपलब्ध अनुदेश में समन्वयक के बाद अन्य स्तरों का परीक्षण और बैंक को स्वीकृत अंतरण आदेश भेजने की प्रक्रिया है। उसमें किसी एक चरण के लिए लिखे 2–4 दिन को किसान के खाते में पैसा आने की सार्वभौमिक समय-सीमा न मानें। बैंक statement/passbook और विभागीय payment remark देखें।
सितंबर form के निर्देश बैंक को Aadhaar/NPCI से linked रखने की घोषणा मांगते हैं। पंजीकरण में account number सही दिखाई देना अकेले यह प्रमाण नहीं है कि DBT mapping भी सही है। बैंक-सम्बंधी आपत्ति हो तो अपनी संबंधित बैंक शाखा से Aadhaar/NPCI mapping की पुष्टि कराएं; कृषि कार्यालय से land record ठीक कराना और बैंक mapping ठीक कराना अलग काम हैं।
पोर्टल की तकनीकी समस्या के लिए वर्तमान application/status pages पर agridbtcell2@gmail.com है। DBT homepage पर हेल्पलाइन 1800-180-1551 दी है; क्षेत्र और सत्यापन के लिए आधिकारिक जिला कृषि पदाधिकारी संपर्क सूची से संबंधित कार्यालय चुन सकते हैं। प्रश्न में अपना season, समस्या और पावती का संदर्भ स्पष्ट रखें; OTP या password साझा न करें।
किसी वितरण कार्यक्रम की खबर या दूसरे बाढ़ राहत लाभ की राशि से अपना अनुदान तय न करें। आपके लिए उपयोगी प्रमाण हैं—सही घटना का आदेश, अपने खेत का सत्यापित दावा, आवेदन की पावती और वास्तविक बैंक credit। अन्य विषयों की गाइड सरकारी योजना श्रेणी में मिलेंगी।
